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Uttarakhnad Home Guard & Civil Defense

परिचय

होमगार्ड्स

‘‘होमगार्ड्स’’ नामक स्वयंसेवी संगठन की स्थापना सर्वप्रथम इंग्लैण्ड में द्वितीय विश्व युद्ध के समय हुई थी। भारत वर्ष में होमगार्ड्स संगठन दिसम्बर 1946 में मुम्बई में शान्ति व्यवस्था ड्यूटी हेतु स्थापित किया गया था। कालान्तर में इस प्रकार की स्वयंसेवी संगठनों की महत्ता एवं उपयोगिता को देखते हुये कई राज्यों में होमगार्ड्स स्वयं सेवकों की स्थापना की गयी। वर्ष 1962 में भारत पर हुये चीनी आक्रमण के उपरान्त भारत सरकार द्वारा सभी राज्यों को यह निर्देश दिये गये थे कि वे सभी विद्यमान स्वयं सेवी संस्थाओं को एकीकृत कर होमगार्ड्स के रूप में स्थापित करें। तत्पश्चात् उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा उत्तर प्रदेश होमगार्ड्स अधिनियम 1963 पारित किया गया, जिसके अन्तर्गत वर्तमान में उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड में होमगार्ड्स कार्य कर रहे हैं।

होमगार्ड्स विभाग का मुख्य कार्य पुलिस के सहायक के रूप में कार्य करना है, अपेक्षा किये जाने पर सार्वजनिक व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा बनाये रखने में सहायता करना, आपात्काल के समय लोक समाज की सहायता करना, विशिष्ट कार्यों हेतु नियत किये जाने पर आपातकालीन दल के रूप में कार्य करना, अत्यावश्यक सेवाओं के अनुरक्षण की व्यवस्था करना व लोक कल्याण से सम्बन्धित कार्यों को करना है।

उत्तराखण्ड राज्य के सृजन के बाद राज्य में होमगार्ड्स स्वयं सेवकों का विशेष योगदान रहा है राज्य पुलिस बल सीमित होने के कारण विभिन्न मेलों, त्यौहारों, यातायात, शान्ति व्यवस्था, यात्रा सीजन, बोर्ड परीक्षाओं, चुनाव व कुम्भ मेला आदि में होमगार्ड्स स्वयं सेवको की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। होमगार्ड्स सुदूर पर्वतीय ग्रामीण अंचलो में राजस्व पुलिस के कर्मियों के साथ शान्ति व्यवस्था बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उत्तराखण्ड राज्य की विधान सभा एवं सचिवालय की समुचित सुरक्षा किये जाने तथा कार्यालय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिये होमगार्ड्स कर्मी बड़ी लगन से डयूटी निभा रहे हैं, इसके साथ ही महत्वपूर्ण संस्थानो जैसे दूरदर्शन केन्द्र, खाद्य निगम, परिवहन, व्यापार कर, जेल, जल संस्थान, बी0एच0ई0एल0, हरिद्वार व नैनीताल झील प्राधिकरण विभाग आदि में अपनी डयूटियों का निर्वहन कर रहे हैं।

नागरिक सुरक्षा

भारत में नागरिक सुरक्षा विभाग का सृजन वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के उपरान्त हुआ था। केन्द्रीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 के लागू होने के पश्चात देहरादून नगर में नागरिक सुरक्षा की स्थापना फरवरी 1970 में की गयी थी। नागरिक सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य दुश्मन राष्ट्र के द्वारा किये गये हवाई आक्रमण से होने वाले जनधन की क्षति को कम करना है।

इस हेतु नागरिक सुरक्षा की 11 सेवाओं का गठन किया है जो इस प्रकार है।

(1) मुख्यालय सेवा (2) वार्डन सेवा (3) हताहत सेवा (4) प्रशिक्षण सेवा (5) अग्निशमन सेवा (6) बचाव सेवा (7) कल्याण सेवा (8) डिपों एवं परिवहन सेवा (9) पूर्ति सेवा (10) शव निस्तारण सेवा (11) उद्वार सेवा।

उपर्युक्त 11 सेवाओं में से केवल वार्डन सेवा ही एक ऐसी सेवा है, जिसमें नगर के प्रभावशाली एवं स्वेच्छा से कार्य करने वाले अवैतनिक व्यक्ति होते है; इस सेवा को नागरिक सुरक्षा का मेरूदण्ड भी कहा जाता है। आपातकाल में वार्डन अपने-अपने क्षेत्र में होने वाली घटनाओं पर नियन्त्रण करते हैं और क्षति की सूचना प्रशासन को उपलब्ध कराते हैं। शान्तिकाल में प्रशासन द्वारा वार्डनों को राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सहयोग देने हेतु भी लगाया जाता है। शेष सेवाओं के लिये सभी सरकारी विभागों के अधिकारी/कर्मचारी एवं होमगार्ड के स्वयं सेवक नामित होते हैं, मूलतः विभाग की स्थापना वाह्य आक्रमण के प्रभावों को कम करने के लिए की गई थी, किन्तु वर्तमान परिदृश्य में संगठन की भूमिका आपदा प्रबन्धन के लिए भी उपयुक्त पाई गई है।

नागरिक सुरक्षा कर्मियों के संचालन के लिये नागरिक सुरक्षा विभाग में पूर्णकालिक अधिकारी/कर्मचारी स्वीकृत हैं। देहरादून में नागरिक सुरक्षा विभाग में दो प्रभागों की स्वीकृति है, वर्तमान में नागरिक सुरक्षा विभाग की स्वीकृति उत्तराखण्ड राज्य में केवल देहरादून नगर के लिये ही है। उत्तराखण्ड राज्य के पांच जनपदों क्रमशः रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा में नागरिक सुरक्षा इकाई खोले जाने हेतु अधिसूचना जारी की जा चुकी है।